Dard Bhare Alfaaz

Dard Bhare Alfaaz

Dard Bhare Alfaaz: दर्द भरे अल्फाज़ वो एहसास हैं, जो दिल की गहराइयों से निकलते हैं। ये सिर्फ शब्द नहीं होते, बल्कि किसी के टूटे हुए ख्वाब, अधूरी चाहत और अकेलेपन की कहानी होते हैं। जब कोई अपना दूर चला जाता है, तो उसकी यादें इन अल्फाज़ के जरिए जिंदा रहती हैं।

दर्द भरे अल्फाज़ हमें ये भी सिखाते हैं कि जिंदगी में हर खुशी के साथ थोड़ा दुख भी जरूरी है। ये हमें मजबूत बनाते हैं और हमें खुद को समझने का मौका देते हैं।

अंत में, यही कहा जा सकता है कि दर्द भरे अल्फाज़ सिर्फ उदासी नहीं होते, बल्कि वो हमारे दिल के सबसे सच्चे एहसास होते हैं, जो हमें इंसान होने का एहसास दिलाते हैं।

Dard Bhare Alfaaz

 Dard Bhare Alfaaz

कर के बेचैन फिर मेरा हाल ना पूछा
उसने नजरें फेर लीं मैंने भी सवाल ना पूछा…

Dard Bhare Alfaaz Shayari

चलो आज किस्सा तमाम ही हो गया,
जो पहले अपना था आज अनजान हो गया।

Dard Bhare Alfaaz Text

पता नही कब खत्म होगी ये जिंदगी
सच में अब जीने का मन नही करता….!

खैर…. आपको आपकी मंजिल मिले
हमारे तो रास्ते और मंजिल दोनो ही खो गये….!

चलो आज किस्सा तमाम ही हो गया,
जो पहले अपना था आज अनजान हो गया।

Dard Bhare Alfaaz Shayari

मेरे दुख-दर्द का तुझ पर हो असर कुछ ऐसा,
मैं रहूँ भूका तो तुझ से भी न खाया जाए!

जिस्म से मेरे तड़पता दिल कोई तो खींच लो,
मैं बगैर इसके भी जी लूँगा मुझे अब है यकीन!

बहुत जरूरी तो नहीं हूं मैं पर एक
दिन मेरी कमी महसूस होगी तुम्हें!

“जख्मी हो गई नींद मेरी
ख्वाबों पर किसने वार किया
जिस्म तो सलामत बच गया
रूह को किसने मार दिया”

जिंदगी में कुछ खास नहीं,
जो खास है वो पास नहीं!

दिल आज तक तकलीफ, मैं है !!
और तकलीफ देने वाला दिल मैं !!

अगर मुझे चाहने वाले हजारों मिल जाए तब भी,
मेरी पहली और आखिरी पसंद तुम रहोगे.!

मैं ख़ामोशी तेरे मन की, तू अनकहा अलफ़ाज़ मेरा,
मैं एक उलझा लम्हा, तू रूठा हुआ हालात मेरा.!

दो कदम का फासला तुमसे मिटाया ना गया,
तुमतो ज़िंदगी साथ गुजारने की बात करते थे।

हर रिश्ते में बस यही गिला है,
हमें कोई हमसा नही मिला है।

तलाश रही हु खुदको खुद में,
हर लम्हे में तुम्ही तुम मिले मुजे ।

Dard Bhare Alfaaz Text

तुम जमाने मे जाओ मगर याद रखना,
तुमको सुकून हमारे पास ही आएगा।

में मर ही जाता अगर तुम ना मिलते,
साँसे अटक सी गईथी तेरे इंतेजार में!

याद आते हैं तो फिर टूट के याद आते हैं,
गुजरे हुए लम्हे, बिछड़े हुए लोग..!

गुम यह नही की वक्त ने साथ नही दिया,
गम यह है कि जिसको वक्त दिया उसने साथ नही दिया।

में जानता हूं कि वो फरेब कर रहा है,
पर क्या करूँ दिले मुद्दतो से उसी पर मर रहा है।

हमें कोई ना पहचान पाया करीब से,
कुछ अंधे थे… कुछ अंधेरों में थे ।।

अच्छी थी कहानी मगर अधूरी रह गई,
इतनी मोहब्बत के बाद भी दूरी रह गई….!

सभी कहते है मेरी शायरी मे है बड़ा दर्द,
पर बनना कोई नही चाहता मेरा हमदर्द ।।

बंद रहते हैं जो अल्फ़ाज़ किताबों में सदा,
गर्दिश-ए-वक़्त मिटा देती है पहचान उन की।

हमें कोई ना पहचान पाया करीब से,
कुछ अंधे थे… कुछ अंधेरों में थे।।

Firaq Gorakhpuri Shayari >


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