Adhure Alfaaz: Kabhi kabhi dil mein itni baatein hoti hain… par lafz poore nahi padte. Jaise kuch kehna ho, par keh na pao. Yeh hi toh hain adhure alfaaz.
Har insaan ke paas ek kahani hoti hai. Kuch kahaniyan poori ho jaati hain, aur kuch bas dil ke kisi kone mein adhuri reh jaati hain. Hum muskura dete hain, log samajhte hain sab theek hai… par andar hi andar kuch alfaaz humesha ghoomte rehte hain — jo kabhi zubaan tak aa hi nahi paate.
Adhure Alfaaz

एक उम्र कटी दो अलफाज़ में,
एक आस में, एक काश में।

कत्ल हुआ हमारा इस तरह किश्तों में,
कभी खंजर तो कभी कातिल बदल गए।।

जहां तक आकर तुम गए हो ना,
वहां तक अभी कोई पहुंचा ही नही…

दिल की बात कहूं तो अब किससे कहूं,
सुनने वाले अब अपने नही रहे…

हमें भी इश्क़ हुआ था, वो भी इश्क़ में शामिल थे शायद,
उसकी हंसी को प्यार समझ लिया, हम गलत थे शायद…

शीशे में डूब कर पीते रहे उस जाम को,
कोशिशें की बहुत मगर भुला न पाए तेरे एक नाम को !

तुम्हारा याद आना भी क्या कमाल होता है,
कभी देखना आकार हमारा क्या हाल होता है…

कोई तो करता होगा हमसे ख़ामोश मोहब्बत,
हम भी किसी की अधूरी मोहब्बत रहे होंगे !

काबिल नही थे फिर भी हमने इकरार किया,
उम्मीद नहीं थी लौटने की फिर भी इंतजार कियाः

काश एक ख्वाहिश पूरी हो इबादत के बगैर,
वो आके गले लगा ले मेरी इजाजत के बगैर!
अधूरे अल्फ़ाज़ शायरी
जिस बात से दिल डरता था वो हो गई,
कुछ दिन के लिए किस्मत जागी थी अब सो गई!
मिजाज, अपना कुछ ऐसा बना लिया हमने,
किसी ने कुछ भी कहा, बस मुस्कुरा दिया हमने।
यही एक राहत भी और गिला भी यही,
वो मिला तो सही मगर मिला ही नही..!
जवाब रखे रखे सवाल हो गए,
अब तो खुद से मिले कई साल हो गए !!
कुछ उसे भी दूरियां पसंद आने लगी थी,
और कुछ मैंने भी वक्त मांगना छोड दिया.!
जिसके होने से मैं खुद को मुकम्मल मानता हूँ,
मैं खुद्रा से पहले मेरी मां को जानता हू!
खाली वक्त में कभी याद आऊं,
समझ लेना तुम्हारे अंदर कहीं जिंदा हूं मै!
गुजर जाएगा ये दौर भी, जरा सबर तो रखिए..
जब खुशी नही ठहरी तो गम की क्या औकात है!
कुछ इस तरह तेरे मेरे रिश्ते ने आखिरी सांस ली,
न मैंने पलट कर देखा न तुमने आवाज दी।
अगर वो अपना है तो उसे पराया ना कर,
मना ले उसे वक्त जाया ना कर।
Adhure Alfaaz Shayari
सवाल ये नही की दर्द कितना है,
बात ये है कि परवाह किसे है.!
बात ये है कि लोग बदल गए हैं,
जुल्म ये है कि मानते भी नहीं.!
उसने मुझे छोड दिया तो क्या हुआ साहेब,
मैंने भी तो छोड़ा था सारा जमाना उसके लिए।
खता हो ना हो, मै माफी मांग लेता हूं,
लफ्ज खर्च हों तो हों, पर शख्स बच जाए।
पकडी जब नब्ज मेरी, हकीम ने यूं बोला,
वो जिंदा है तुझमें, तू मर चुका है जिसमे!
मुझे मनाओ मत मेरी बात समझो,
मै नाराज, नही परेशान हूं इन दिनों!
में खुद खफा हूं खुद से
अब क्या शिकायत करू तुमसे…!
गुजर गया आज का दिन भी पहले की तरह !!
न उनको फुर्सत थी और न हमें ख्याल आया !!
कुछ नही ख़ास इन दिनों….
तू जो नही पास इन दिनों…
सच बड़ी काबिलियत से छिपाने लगे हैं हम !!
हालात पूछने पर सब बढ़िया बताने लगे हैं हम !!
Alfaaz Shayari 2 Line
आगे आने वाला शहर कितना भी पसंदीदा हो,
पीछे छूटने वाला सफर बेचैन कर ही देता है!
बिठा कर डोली में उसको वो इंसान ले गया;
अजनबी शहर का लड़का मेरी जान ले गया…
तू चली गई दूर अरे तेरा जिक्र अब भी है;
दिल में नफरत पर दिमाग में फ़िक्र अब भी है!!
हमारे जैसे हजार मिलेंगे,
पर उन हजारों में हम नही मिलेंगे….
वक्त पर आया करते थे जवाब उनके;
ये भी एक वक्त की बात है…
तुम्हें इतना चाहा कि किसी और को
चाहने की चाहत ही नहीं रही..
धडकने मिलाकर हम धुन बना लेते हैं;
जब डूब जाता है सूरज हम दिल जला लेते हैं।
वो थे न मुझसे दूर न मै उनसे दूर था,
आता न था नजर तो नजर का कुसूर था!
मैं खुद खफा हूं खुद से
अब क्या शिकायत करू तुमसे….
हाथ उठते हुए उनके न कोई देखेगा,
किस के आने की करेंगे वो ‘दुआ मेरे बाद!
हम तुम में कल दूरी भी हो सकती है,
वजह कोई मजबूरी भी हो सकती है।
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