अधूरे अल्फ़ाज़ केवल वह बात नहीं हैं जो किसी ने सुनी नहीं। कभी हम खुद नहीं समझ पाते कि कहना क्या चाहते हैं; कभी एक सही वाक्य कहने में देर हो जाती है। इस संग्रह में छह मौलिक शेर हैं जिनमें विराम, काटा हुआ शब्द और अनभेजा संदेश छोटे चित्र बनकर आते हैं। हर रचना के साथ उसका भाव दिया गया है। उद्देश्य चुप्पी को सजाना भर नहीं, यह पहचानना भी है कि किस अधूरी बात को आगे पूरा किया जा सकता है।
छह नई रचनाएँ और उनके भाव
अनभेजा संदेश
तेरा नाम लिखा, फिर पूरा वाक्य मिटा दिया,
कहना बहुत था, शुरुआत सच नहीं लगती थी।
भाव: यहाँ समस्या शब्दों की कमी से अधिक सही शुरुआत की तलाश है। अनभेजा संदेश उस दुविधा का चित्र है जिसमें भावना मौजूद है, लेकिन तैयार भाषा उसे ठीक से नहीं कहती।
विराम
दो शब्दों के बीच इतनी जगह छोड़ दी,
कि मेरी चुप्पी भी पढ़ी जा सके।
भाव: खाली जगह भी रचना का हिस्सा हो सकती है। इस शेर में विराम अनिश्चितता और संकोच को दिखाता है; उसे हमेशा रहस्य या उदासी समझना आवश्यक नहीं।
काटा हुआ शब्द
जिस शब्द को मैंने काट दिया था,
कागज़ ने उसी जगह सबसे गहरी रेखा रखी।
भाव: लिखने में हटाया गया शब्द भी अपनी छाप छोड़ता है। यह शेर उन भावों के लिए है जिन्हें छिपाने की कोशिश कभी-कभी और स्पष्ट कर देती है।
देर
तू सुनने को तैयार था उस शाम,
मैं अपने मन का अनुवाद अगले दिन कर पाया।
भाव: कभी भाव पहचानने में समय लगता है। यह रचना किसी पक्ष को दोष नहीं देती; बोलने और समझने के समय के बीच का छोटा अंतर दिखाती है।
दूसरा वाक्य
पहली बात मैंने डर में रोक दी थी,
दूसरी बात अब अपने लिए पूरी करूँगा।
भाव: अधूरी बातचीत से आगे बढ़ने का भाव यहाँ दिखाई देता है। दूसरे व्यक्ति का उत्तर मिले या न मिले, अपने अनुभव को स्पष्ट करना फिर भी संभव है।
सादा शब्द
बहुत सुंदर शब्द खोजते रहे हम,
एक साधारण ‘मुझे दुख है’ इंतज़ार करता रहा।
भाव: भारी भाषा हमेशा बेहतर अभिव्यक्ति नहीं होती। कभी सीधे शब्द कविता से अधिक स्पष्ट होते हैं; यह शेर सजावट और ईमानदार कथन के बीच की दूरी पहचानता है।
अपनी बात लिखने के लिए सुझाव
अधूरी बात को लिखने के लिए पहले तीन छोटे वाक्य बनाइए: क्या हुआ, मुझे कैसा लगा और अब मैं क्या कहना चाहता हूँ। फिर किसी एक वाक्य को शेर में बदलें। यदि निजी बातचीत करनी है तो केवल संकेतों पर निर्भर न रहें; कविता के साथ स्पष्ट भाषा भी उपयोग करें। डायरी में अधूरा वाक्य छोड़ना ठीक है, पर उसे अगली बार पढ़कर देखें कि कौन-सा भाव अभी नाम चाहता है। तुक पूरा करने से पहले अर्थ पूरा करना अधिक उपयोगी होता है।