Firaq Gorakhpuri Shayari

Firaq Gorakhpuri Shayari

Firaq Gorakhpuri Shayari: फ़िराक़ गोरखपुरी की शायरी में प्यार, अकेलापन और इंसानी जज़्बातों की बात होती है। उनके शब्द कोमल और गहरे होते हैं। वह इस बारे में लिखते हैं कि लोग अपने अंदर कैसा महसूस करते हैं, खासकर तब जब वे किसी को याद करते हैं या उदास होते हैं। उनकी शायरी समझने में आसान होती है, लेकिन उसमें गहरे जज़्बात छिपे होते हैं।

Firaq Gorakhpuri Shayari

ये माना जिंदगी है चार दिन की
बहुत होते हैं यारों चार दिन भी ।

कर पाओ तो कर लेना कीही हमारी सादगी
से क्योंकि सूरत कुछ खास नहीं हमारी ।

रफ्ता रफ्ता गैर अपनी ही नज़र में हो गए,
वाह-री गफलत तुझे अपना समझ बैठे थे हम.!

एक मुद्दत से तिरी याद भी आई न हमें,
और हम भूल गए हों तुझे ऐसा भी नहीं.!

मौत का भी इलाज हो शायद,
जिंदगी का कोई इलाज नहीं!

बहुत पहले से उन कदमों की आहट जान लेते हैं,
तुझे ऐ जिन्दगी, हम दूर से पहचान लेते हैं.!

Firaq Gorakhpuri Best Shayari

मैं हूँ दिल है तन्हाई है,
तुम भी होते अच्छा होता!

दिलों को तेरे तबस्सुम की याद यूँ आई,
कि जगमगा उठें जिस तरह मंदिरों में चराग़!

खैर सच तो है सच मगर ऐ झूठ
मैं ने तेरा भी ए’तिबार किया!

हर फ़रेब-ए-ग़म-ए-दुनिया से ख़बरदार तो है,
तेरा दीवाना किसी काम में हुशियार तो है!

बर्फ़-ए-फ़ना भी खाए जहाँ ठोकरें ‘फ़िराक़’
राह-ए-वफ़ा में आते हैं ऐसे मक़ाम भी!

ज़िंदगी क्या है आज इसे ऐ दोस्त,
सोच लें और उदास हो जाएँ!

बहुत दिनों में मोहब्बत को ये हुआ मा’लूम
जो तेरे हिज्र में गुजरी वो रात रात हुई!

क्यूँ इंतिहा-ए-होश को कहते हैं बे-ख़ुदी,
खुर्शीद ही की आख़िरी मंज़िल तो रात है!

तुम मुखातिब भी हो क़रीब भी हो,
तुम को देखें कि तुम से बात करें.!

मुझ को मारा है हर इक दर्द ओ दवा से पहले,
दी सज़ा इश्क़ ने हर जुर्म-ओ-ख़ता से पहले.!

फिराक गोरखपुरी शायरी हिंदी में

हम से क्या हो सका मोहब्बत में
खैर तुम ने तो बेवफ़ाई की.!

आँखों में जो बात हो गई है,
इक शरह-ए-हयात हो गई है!

कर पाओ तो कर लेना कीही हमारी सादगी से
क्योंकि सूरत कुछ खास नहीं हमारी ।,

बहुत पहले से उन कदमों की आहट जान लेते हैं,
तुझे ऐ जिन्दगी, हम दूर से पहचान लेते हैं.!

रात भी नींद भी कहानी भी,
हाय क्या चीज़ है जवानी भी.. ।

सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई,
देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ.!

एक मुद्दत से तिरी याद भी आई न हमें,
और हम भूल गए हों तुझे ऐसा भी नहीं.!

मुझ से मत पूछो के उस शख़्स में क्या अच्छा है,
अच्छे अच्छों से मुझे मेरा बुरा अच्छा है।

खामोश शहर की चीखती रातें,
सब चुप है पर, कहने को है हजार बातें… !


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