Gulzar Shayari in Hindi
Gulzar Shayari in Hindi: Gulzar हिंदी और उर्दू के मशहूर शायर, गीतकार और लेखक हैं। उनकी शायरी अपनी सादगी, गहराई और अनोखे अंदाज़ के लिए जानी जाती है। गुलज़ार साहब के शब्द सीधे दिल में उतर जाते हैं और हमें जिंदगी के छोटे-छोटे एहसासों से जोड़ते हैं।
गुलज़ार शायरी सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि एक एहसास है। अगर आप सादगी में गहराई ढूंढते हैं, तो गुलज़ार की शायरी आपके दिल को जरूर छू जाएगी। उनकी शायरी हमें सिखाती है कि जिंदगी की छोटी-छोटी बातों में भी बहुत खूबसूरती होती है।
Gulzar Shayari in Hindi

इश्क़ की तलाश में
क्यों निकलते हो तुम,
इश्क़ खुद तलाश लेता है
जिसे बर्बाद करना होता है।

तुझ से बिछड़ कर
कब ये हुआ कि मर गए,
तेरे दिन भी गुजर गए
और मेरे दिन भी गुजर गए.

आऊं तो सुबह,
जाऊं तो मेरा नाम शबा लिखना,
बर्फ पड़े तो
बर्फ पे मेरा नाम दुआ लिखना!

वो शख़्स जो कभी
मेरा था ही नही,
उसने मुझे किसी और का भी
नही होने दिया.

सालों बाद मिले वो
गले लगाकर रोने लगे,
जाते वक्त जिसने कहा था
तुम्हारे जैसे हज़ार मिलेंगे.
Best Gulzar Shayari
जब भी आंखों में अश्क भर आए
लोग कुछ डूबते नजर आए
चांद जितने भी गुम हुए शब के
सब के इल्ज़ाम मेरे सर आए!
जिन दिनों आप रहते थे,
आंख में धूप रहती थी
अब तो जाले ही जाले हैं,
ये भी जाने ही वाले हैं.
जबसे तुम्हारे नाम की
मिसरी होंठ लगाई है
मीठा सा गम है,
और मीठी सी तन्हाई है.
वक्त कटता भी नही
वक्त रुकता भी नही
दिल है सजदे में मगर
इश्क झुकता भी नही!
होती नही ये मगर
हो जाये ऐसा अगर
तू ही नज़र आए तू
जब भी उठे ये नज़र!
तुम्हें जिंदगी के उजाले मुबारक
अंधेरे हमें आज रास आ गए हैं,
तुम्हें पा के हम खुद से दूर हो गए थे,
तुम्हें छोड़कर अपने पास आ गए हैं!
उतर रही हो या चढ़ रही हो ?
क्या मेरी मुश्किलों को पढ़ रही हो ?
सुरमे से लिखे तेरे वादे
आँखों की जबानी आते हैं
मेरे रुमालों पे लब तेरे
बाँध के निशानी जाते हैं!
तेरे इश्क़ में तू क्या जाने
कितने ख्वाब पिरोता हूं
एक सदी तक जागता हूं मैं
एक सदी तक सोता हूं!
गुल पोश कभी इतराये कहीं
महके तो नज़र आ जाये कहीं
तावीज़ बनाके पहनूं उसे
आयत की तरह मिल जाये कहीं!
Beautiful Gulzar Shayari lyrics
पता चल गया है के मंज़िल कहां है
चलो दिल के लंबे सफ़र पे चलेंगे
सफ़र ख़त्म कर देंगे हम तो वहीं पर
जहाँ तक तुम्हारे कदम ले चलेंगे!
उम्मीद तो नही फिर भी उम्मीद हो,
कोई तो इस तरह आशिक़ शहीद हो!
कोई आहट नही बदन की कहीं
फिर भी लगता है तू यहीं है कहीं
वक्त जाता सुनाई देता है,
तेरा साया दिखाई देता है!
तू समझता क्यूं नही है,
दिल बड़ा गहरा कुआँ है,
आग जलती है हमेशा
हर तरफ धुआँ धुआँ है!
प्यार में अज़ीब ये रिवाज़ है,
रोग भी वही है जो इलाज है.!
जाने कैसे बीतेंगी ये बरसातें
माँगें हुए दिन हैं, माँगी हुई रातें.
ऐसा कोई ज़िंदगी से वादा तो नही था,
तेरे बिना जीने का इरादा तो नही था.
वो बेपनाह प्यार करता था मुझे,
गया तो मेरी जान साथ ले गया!
इस दिल में बस कर देखो तो
ये शहर बड़ा पुराना है,
हर साँस में कहानी है,
हर साँस में अफ़साना है!
कोई वादा नही किया लेकिन
क्यों तेरा इंतज़ार रहता है,
बेवजह जब क़रार मिल जाए,
दिल बड़ा बेकरार रहता है!
Famous Gulzar Shayari Zindagi
धीरे-धीरे ज़रा दम लेना,
प्यार से जो मिले गम लेना,
दिल पे ज़रा वो कम लेना!
दबी-दबी साँसों में सुना था मैंने
बोले बिना मेरा नाम आया
पलकें झुकी और उठने लगीं तो
हौले से उसका सलाम आया!
खून निकले तो ज़ख्म लगती है,
वरना हर चोट नज़्म लगती है.!
उड़ते पैरों के तले जब बहती है जमीं
मुड़के हमने कोई मंज़िल देखी तो नही
रात दिन हम राहों पर शामो सहर करते हैं
राह पे रहते हैं यादों पे बसर करते हैं!
इतना लंबा कश लो यारो,
दम निकल जाए
जिंदगी सुलगाओ यारों,
गम निकल जाए!
वो चेहरे जो रौशन हैं लौ की तरह
उन्हें ढूंढने की जरूरत नही
मेरी आँख में झाँक कर देख लो
तुम्हें आइने की जरूरत नही!
मेरे उजड़े उजड़े से होठों में
बड़ी सहमी सहमी रहती है जबाँ
मेरे हाथों पैरों में खून नही
मेरे तन बदन में बहता है धुँआ!
वक्त सालों की धुंध से निकल जायेगा,
तेरा चेहरा नज़र से पिघल जायेगा!
वो शाम कुछ अजीब थी,
ये शाम भी अजीब है
वो कल भी पास पास थी
वो आज भी करीब है!
जीना भूले थे कहां याद नहीं!
तुमको पाया है जहाँ
सांस फिर आई वहीं!
4 Line Gulzar Shayari in Hindi
क्यूं बार बार लगता है मुझे,
कोई दूर छुपके तकता है मुझे,
कोई आस पास आया तो नही,
मेरे साथ मेरा साया तो नही!
तुम मिले तो क्यों लगा मुझे,
खुद से मुलाकात हो गई
कुछ भी तो कहा नही मगर,
ज़िंदगी से बात हो गई!
शाम से आँख में नमी सी है,
आज फिर आपकी कमी सी है!
ख़ामोश रहने में दम घुटता है,
और बोलने से ज़बान छिलती है,
डर लगता है नंगे पांव मुझे
कोई कब्र पांव तले हिलती है!
टूटी फूटी शायरी में,
लिख दिया है डायरी में,
आख़िरी ख्वाहिश हो तुम
लास्ट फरमाइश हो तुम!
मुस्कुराना, सहते जाना, चाहने की रस्म है,
ना लहू ना कोई आँसू इश्क़ ऐसा ज़ख्म है!