Alfaz Shayari in Hindi

Alfaaz Shayari In Hindi

Alfaz Shayari in Hindi: शब्दों में बहुत ताकत होती है, और जब यही शब्द दिल से निकलते हैं, तो वे सीधे दिल तक पहुंचते हैं। Alfaz Shayari in Hindi ऐसे ही खास अल्फाज़ का संगम है, जो हमारे जज़्बातों को खूबसूरती से बयां करती है।

Alfaz Shayari in Hindi

Alfaaz Shayari In Hindi

मिजाज, अपना कुछ ऐसा बना लिया हमने,
किसी ने कुछ भी कहा, बस मुस्कुरा दिया हमने।

अल्फाज़ शायरी हिंदी में

यही एक राहत भी और गिला भी यही,
वो मिला तो सही मगर मिला ही नही..!

Gulzar’s Alfaaz Shayari 2 line

जवाब रखे रखे सवाल हो गए,
अब तो खुद से मिले कई साल हो गए !!

kuch ankahe alfaaz shayari in hindi

कुछ उसे भी दूरियां पसंद आने लगी थी,
और कुछ मैंने भी वक्त मांगना छोड दिया.!

 alfaaz shayari dp Hindi

जिसके होने से मैं खुद को मुकम्मल मानता हूँ,
मैं खुद्रा से पहले मेरी मां को जानता हूं।

 Alfaaz Shayari In Hindi

खाली वक्त में कभी याद आऊं
समझ लेना तुम्हारे अंदर कहीं जिंदा हूं मै!

अल्फाज़ शायरी हिंदी में

गुजर जाएगा ये दौर भी, जरा सबर तो रखिए..
जब खुशी नही ठहरी तो गम की क्या औकात है!

कुछ इस तरह तेरे मेरे रिश्ते ने आखिरी सांस ली,
न मैंने पलट कर देखा न तुमने आवाज दी।

अगर वो अपना है तो उसे पराया ना कर
मना ले उसे वक्त जाया ना कर।

सवाल ये नही की दर्द कितना है,
बात ये है कि परवाह किसे है.!

Alfaaz Shayari Dp Hindi

सोचता रहा रात भर करवट बदल बदल कर,
वो क्यूं इतना बदल गया मुझे इतना बदल कर..!

मालूम है के तकलीफ होती है मुझे उसके नाम से,
फिर भी लोग मुझ से उसका ही जिक्र करते हैं।

मुझे मुस्कुराता देख हैरान थे वो साहब,
शायद उदास देखने की आदत सी हो गई है..

जैसा दर्द हो वैसा मंजर होता है,
मौसम तो इंसान के अंदर होता है.!

वो जो कहते हैं कि खुश हैं जिंदगी में,
होते तो कहने की जरूरत ही ना पड़ती।

दिल तो था ही नही पास मेरे,
ये जो टूटा वो भरोसा था मेरा।

रंग देखने को तब मिलते हैं बड़े नसीब से,
जब गुजरना पडता है किसी के बेहद करीब से.!

मै महफिल में आए हर शख्स के गले लगा,
क्यूंकि आशिकों की महफिल थी और दिल सबके टूटे थे।

बस इतना सा असर होगा मेरी यादों का,
कि कभी तुम बिना बात के मुस्कुराओगे..!

रात खामोशी से चुप चाप है,
पर तेरी यादों का शोर बेहिसाब है।

Kuch Ankahe Alfaaz Shayari in Hindi

वो सोचती होगी बडे. चैन से सो रहा हूं मै,
उसे क्या पता ओढ के चादर रो रहा हूं मै।

बहुत भीड. है मोहब्बत के इस शहर में,
एक बार जो बिछडा, वापस नही मिलता.!

गुजर गया आज का दिन पहले की तरह
न उनको फुर्सत थी और न हमें ख्याल आया!

है इश्क अगर तो अब वक्त जाया ना कर,
मान ही लिया है अपना तो पराया ना कर।।

धडक़ने मिलाकर हम धुन बना लेते हैं,
जब डूब जाता है सूर्ज हम दिल जला लेते हैं।

नजरिया बदल के देख, हर तरफ नजराने मिलेंगे,
ऐ जिंदगी यहां तेरी तकलीफों के भी दीवाने मिलेंगे.

खेलते आज भी हैं लोग मेरे दिल के साथ,
पर खिलाडी अब तक कोई तुम सा नही मिला।

छोड दिया मोहब्बत करना, क्योंकि हमसे होती नही है,
अब आंखे नम तो होती हैं, लेकिन रोती नही है।

वक्त यूं रेत की तरह फिसलता रहा,
कोई मिलता रहा तो कोई बिछडता रहा.!!

लोगों की बातें सुनकर छोड, जाने वाले,
हम कितने बुरे हैं पता तो कर लेते..!!

Gulzar’s Alfaaz Shayari 2 line

घर जल रहा था मेरा, सब तमाशा देख रहे थे,
जिनसे उम्मीद थी मदद की, वो हाथ सेंक रहे थे.!

जब नाराजगी किसी खास से होती है,
तो इन्सान चिल्लाता नही सिर्फ खामोश हो जाता है.!

मेरे पास ही है मगर ना जाने क्यों
अब वो शख्स गया सा लगता है.!

जिन्दगी जब भी लगा तुझे पढ. लिया,
कमबख्त तूने एक और पन्ना खोल दिया..

वो कह कर गए कि ‘कल’ से भूल जाना हमे,
हमनें भी सदियों से ‘आज’ को रोककर रखा है।

मुझे मनाओ मत मेरी बात समझो
मै नाराज नही परेशान हूं इन दिनों!

पकडी जब नब्ज मेरी, हकीम ने यूं बोला
वो जिंदा है तुझमें, तू मर चुका है जिसमे!

खता हो ना हो, मै माफी मांग लेता हूं
लफ्ज खर्च हों तो हों, पर शख्स बच जाए।

उसने मुझे छोड, दिया तो क्या हुआ साहेब,
मैंने भी तो छोडा था सारा जमाना उसके लिए।

जब गिला शिकवा अपनो से हो तो खामोशी भली
अब हर बात पर जंग हो जरूरी तो नही..!!

अल्फाज़ शायरी हिंदी में

जिस बात से दिल डरता था वो हो गई
कुछ दिन के लिए किस्मत जागी थी अब सो गई!

काश एक ख्वाहिश पूरी हो इबादत के बगैर
वो आके गले लगा ले मेरी इजाजत के बगैर!

जिंदगी में कुछ हसीन पल यूं ही गुजर जाते हैं,
रह जाती हैं यादें और इंसान बिछड जाते हैं

आग, जहर, मौत फिर सब प्यारी लगने लगती है,
अपनी बेचारगी भी जब बेचारी लगने लगती है।

तुम्हें अपना कहने की तमन्ना थी दिल में,
लबों तक आते आते तुम गैर हो गए..!!

ज़रूरी नहीं चुभे कोई बात ही…
बात न होना भी चुभता है बहुत…

गुरूर कहता है क्या मरना किसी पर..,
तन्हाई कहती है तू जीता है उसी के लिए..

दिल की तकलीफ़ कम नही करते,
अब कोई शिकवा हम नही करते…

मरहम है तू, ताउम्र घाव रहने दे,
दवा है तू मेरी, मुझे ताउम्र बीमार रहने दे…

पहले चुभा बहुत, अब आदत सी है…
ये दर्द पहले था, अब इबादत सी है…

Mirza Ghalib Shayari >


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